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वकील, दुर्घटना के मामलों में क्षतिपूर्ति के लिए दावों को दाखिल करने में मदद कैसे करता है?

November 24, 2021

जयपुर में दुर्घटना वकील – भारत के कानून के तहत, दुर्घटना के बाद यदि किसी भी व्यक्ति को क्षति/चोट लगती है तो चोट के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था से दुर्घटना पीड़ित व्यक्ति को वकील की मदद से मुआवजा प्राप्त करवाने का प्रावधान है । यदि आपके साथ भी कोई दुर्घटना होती है और आप जिम्मेदार व्यक्ति से मुआवजा प्राप्त करना चाहते हैं, तो एक्सीडेंट लॉयर इसमें आपकी कैसे मदद कर सकता है? यही आप इस लेख में जानेंगे। इसलिए यदि आप यह जानने में रुचि रखते हैं, तो हमारे लेख को अंत तक पढ़ें।

एक्सीडेंट पीड़ित का वकील व्यक्तिगत चोट के दावे को दाखिल करने में कैसे मदद करता है?

वैसे तो यह प्रक्रिया बहुत सरल है। लेकिन अगर आपने पहले कभी दावा नहीं किया है, तो आपको थोड़ी मुश्किल हो सकती है। लेकिन अगर आपने पहले भी दावा किया है, तो आपको हर प्रक्रिया की अच्छी जानकारी होगी।  हमने पूरी प्रक्रिया को समझाने के लिए सभी चरण बताए हैं।

चरण 1: सबसे पहले प्राथमिक चिकित्सा उपचार।

अगर आप किसी दुर्घटना में घायल हो जाते हैं  भी चोट लगती है तो सबसे पहले आप अपना अच्छे से उपचार करवाएं (अगर बढ़िया अस्पताल चुनने का मौका मिले तो छोड़िएगा मत)। इससे आपको पता चलेगा कि आपको कितनी चोटें आई हैं और आपको व्यक्तिगत रूप से कितना नुकसान हुआ है।  एक्सीडेंट वकील की मदद से आप अपनी सभी चोटों के लिए मुआवज़ा भी प्राप्त कर सकते हैं ।

चरण 2: किसी अनुभवी  एक्सीडेंट लॉयर से पर्सनल इंज्युरी के लिए संपर्क करें।

अब अपने अनुभवी वकील से बात करके इस बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करने की आपकी जिम्मेदारी है। आपके वकील आपको कानून के बारे में पूरी जानकारी जरूर देंगे। बशर्ते आप अपने एक्सीडेंट लॉयर से कुछ ना छुपाये ताकि कोर्ट में  दावा करने में कोई गलती ना हो।

चरण 3: आपके पर्सनल Injury लॉयर द्वारा दावा स्थापित करना।

अब आपका वकील पूरा मामला तैयार करेगा और उस व्यक्ति को सूचित करेगा जिसके कारण आपको चोट लगी है। साथ ही, वह उनकी बीमा कंपनी को भी सूचित करेगा।  वे आपके दावे का निपटारा जल्द से जल्द करवाने की कोशिश करेंगे।

चरण 4: जानकारी जुटाना और आपकी चोटों का उपचार।

अब आपका वकील आपके डॉक्टर से आपकी चोट के बारे में पूरी जानकारी लेगा, जिसमें यह भी शामिल होगा कि आपको किस तरह के इलाज की ज़रूरत होगी और उसका कितना खर्च आएगा। इसके अलावा, आपके वाहन या संपत्ति को कितना नुकसान हुआ है, यह भी देखेगा। इसके लिए पहले से ही सारे डाक्यूमेंट्स जैसे की डॉक्टर या हॉस्पिटल की एक्सीडेंट वाले दिन की पर्ची, लगी हुई चोट की फोटोज, वाहन या सम्पति के नुकसान की फोटोज, और संभव हो सके तो एक्सीडेंट वाले समय की वीडियो (मजबूत साक्ष्य होगा) आदि सभी तैयार करके रखे।

चरण 5: समझौता ज्ञापन।

अब आपका वकील मामले को जल्द से जल्द निपटाने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति से मुआवजे की मांग कर सकता है।

चरण 6: समझौता हो गया है या मुकदमा दायर किया गया है।

यदि मामले का निपटारा बातचीत के माध्यम से हो जाता है, तो आप और आपके एक्सीडेंट लॉयर, जिम्मेदार व्यक्ति द्वारा दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार कर लेंगे।  लेकिन यदि आप उनके प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं, तो आप अपनी इच्छित राशि के लिए मुकदमा दायर कर सकते हैं।

चरण 7: मुकदमा दायर करना।

यदि आप जिम्मेदार पक्ष के निर्णय को स्वीकार नहीं करते हैं, तो अब आप मुकदमा करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं।

मुकदमा दायर करने की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार है।

मुकदमा दायर करने के लिए आपको अदालत में लिखित आवेदन देना होगा। आपको कितनी चोटें आई हैं? और आपको कितना नुकसान हुआ है? इसके साथ ही, आप कितने मुआवजे की मांग कर रहे हैं? आपको यह सारी जानकारी लिखित में देनी होगी।

मामला दर्ज होने के बाद अदालत में सुनवाई होगी। जिसमें दोनों पक्षों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान होगा और दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क बयान के रूप में प्रस्तुत करेंगे। अपनी अपनी राय देंगे और खुद को बेक़सूर साबित करने की कोशिश करेंगे।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान, दोनों पक्षों को अपने-अपने दृष्टिकोण को साबित करने के लिए सबूत पेश करने होंगे।

अंत में, यदि आपके सबूत और आपका मामला मजबूत है, तो न्यायाधीश आपके पक्ष में फैसला सुनाएंगे। और आपको कितनी राशि मिलेगी, यह भी वही तय करेंगे।

निष्कर्ष

हमें आशा है कि इस लेख में दी गई सभी जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी। यदि आपके कोई और प्रश्न हैं, तो आप नीचे दिए गए फॉर्म में सही जानकारी भरकर अपने प्रश्नों के उत्तर प्राप्त कर सकते हैं।

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